सिरसा के आखिरी छोर का गांव गुसाईयाना, 209 साल पहले गुसाई जी महाराज ने बसाया था गांव

 

सिरसा जिले के राजस्थान की तरफ आखिरी छोर का गांव गुसाईयाना अपने आप में बड़ा इतिहास समेटे हुए है। गुसाईयाना गांव को महाराज गुसाई जी ने करीब 209 वर्ष पूर्व बसाया था। इन्ही के नाम पर गांव का नाम पड़ा था। गुसाईं जी महाराज की गांव में समाधि बनी हुई है। इस गांव की जनसख्या करीब 2600 से ज्यादा है। वहीं गांव का रकबा करीब 2827 एकड़ का है।

गांव में मुख्य जातियां
गांव में बैनीवाल,खोड, जाट माली, भारी, ख्यालिया, बिश्नोई, न्योल, सुनार, खाती, नायक, हरिजन, बाल्मिकी, सहू,शर्मा, बनिया, नाई, जाखड़, गोदारा, रेगर, लखेरा, सरदार, इसराण, बेदा जाति के लोग आपस में मिल जुलकर रहते हैं।

गांव के स्वतंत्रता सेनानी
श्री बदरी प्रसाद भारी, श्री नानक राम, श्री हीरा लाल न्योल

गांव के सैनिक और पुलिस जवान
कृष्ण कुमार जांगड़ा, सतबीर सिंह न्योल ( रिटायर्ड ), पवन कुमार बिश्नोई, सीता राम भारी, संदीप कुमार ख्यालिया, सोनू लखेरा, पन्ना लाल न्योल, रोहताश माली, कुलदीप सिंह चालिया, कुलदीप सिंह शामिल हैं।

गांव से मुख्य अधिकारी कर्मचारी
गुसाईयाना गांव से काफी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी रहे हैं जिन्होंने देश प्रदेश की सेवा में अपना समर्पण किया है। इनमें जयनारायण खोड, आशराम खोड, सुभाष बैनीवाल, भागमल भारी, बलवीर सिंह बैनीवाल, संदीप ख्यालिया, सोनू शर्मा क्लर्क शामिल हैं।

गांव के सरपंच, पंच और ब्लॉक मेंबर
गुसाईयाना गांव में मौजूदा सरपंच रघुबीर सिंह अठवाल हैं, जबकि गांव में कई पंच है जबकि ब्लॉक समिति की मेंबर अंजना जांगड़ा हैं।

गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय
गुसाईयाना गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी है। यहां पर लोगों का पशुपालन में भी रुचि है। ग्रामीणों के पास काफी संख्या में दूधारू पशु हैं।

जीव प्रेमी है गांव गुसाईयाना
गुसाईयाना गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस गांव में जीव अभ्यरण्य है और यहां पर जीव जंतुओं और पशुओं का शिकार करना अपराध है। गांव के ज्यादातर लोग शाकाहारी है और गांव में मांस मीट और अंडे की रेहड़ी तक नहीं लगती।

गांव में मुख्य धार्मिक स्थल
गांव में गुसाई जी महाराज का मंदिर, श्रीकृष्ण जी, शिवजी मंदिर, हनुमान मंदिर, रामदेव जी मंदिर, गोगामेड़ी, गुरुद्वारा, शीतला माता मंदिर, श्री जम्भेश्वर जी मंदिर शामिल है।

गांव में सरकारी सुविधाएं
गुसाईयाना में सरकारी अस्पताल, सरकारी स्कूल, पशु अस्पताल, खेल स्टेडियम, बॉलीवाल स्टेडियम, लाइब्रेरी, ग्राम सचिवालय, धर्मशाला, आंगनबाड़ी, पार्क केंद्र शामिल हैं।

Pauline Roussel

Je suis Pauline Roussel, journaliste culinaire et consultante en arts de la table depuis plus de quinze ans. Diplomee en management de l’hotellerie-restauration a l’Institut Paul Bocuse et ancienne critique gastronomique pour un guide regional Gault&Millau, j’ai explore cuisines de terroir et tables etoilees. Mon travail m’a menee des bistrots parisiens aux auberges familiales italiennes, avec une attention particuliere pour le lien entre gastronomie, voyage et art de recevoir a la maison. Je partage ici mes experiences concretes, mes methodes d’organisation et mes adresses preferees pour aider chacun a cuisiner mieux et accueillir avec confiance.

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