CDLU ने फोरेंसिक जांच के व्यावहारिक गुर सीखें, FSL विशेषज्ञों ने वास्तविक आपराधिक मामलों की केस स्टडी से समझाया सूक्ष्म साक्ष्यों का महत्व

सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में सोमवार को फोरेंसिक विज्ञान और विधि के विद्यार्थियों के लिए ‘फोरेंसिक केस स्टडी और उभरती फोरेंसिक तकनीकें’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। पुलिस महानिदेशक हरियाणा के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में दोनों विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने वास्तविक आपराधिक मामलों की केस स्टडी के माध्यम से जांच में विज्ञान की भूमिका समझाई। उन्होंने सूक्ष्म साक्ष्यों के महत्व, एडवांस्ड डीएनए तकनीक और साइबर फोरेंसिक के बारे में जानकारी दी।
छोटे साक्ष्य भी खोल सकते हैं बड़े राज
सेमिनार में विशेषज्ञों ने वास्तविक आपराधिक मामलों की केस स्टडी के जरिए बताया कि घटनास्थल से जुटाए गए छोटे-छोटे साक्ष्य भी जांच की पूरी दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने साक्ष्यों के वैज्ञानिक परीक्षण, उनकी उपयोगिता और जांच के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी। विद्यार्थियों को समझाया गया कि फोरेंसिक विज्ञान सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध की गुत्थी सुलझाने और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में भी इसकी अहम भूमिका है।
नई तकनीकों पर भी हुई चर्चा
संवादात्मक सत्र में एडवांस्ड डीएनए प्रोफाइलिंग, डिजिटल एवं साइबर फोरेंसिक और आधुनिक बैलिस्टिक विश्लेषण जैसी तकनीकों पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि अपराधी लगातार तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में जांच अधिकारियों और फोरेंसिक विशेषज्ञों का तकनीकी रूप से सक्षम होना जरूरी है।
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने क्राइम सीन मैनेजमेंट, साक्ष्यों की कानूनी स्वीकार्यता और कोर्ट रूम गवाही से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सवालों के जवाब दिए। विधि के विद्यार्थियों के लिए यह सत्र खासा उपयोगी रहा, क्योंकि उन्हें फोरेंसिक रिपोर्ट की अदालती कार्यवाही में भूमिका समझने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय प्रशासन और दोनों विभागों के अध्यक्षों ने FSL विशेषज्ञों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के कौशल विकास में सहायक होते हैं। इस अवसर पर विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
इस अवसर पर सीन ऑफ क्राइम टीम के विशेषज्ञ डॉक्टर अजमेर सिंह, डॉ. सुमन सांगवान और डॉ. विकास सहित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अशोक मक्कड़, डॉ. विकास पूनिया, डॉ. वकील तथा डॉ. संदीप बिसला ने विद्यार्थियों को फोरेंसिक जांच की बारीकियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व की विस्तार से जानकारी दी।

Pauline Roussel

Je suis Pauline Roussel, journaliste culinaire et consultante en arts de la table depuis plus de quinze ans. Diplomee en management de l’hotellerie-restauration a l’Institut Paul Bocuse et ancienne critique gastronomique pour un guide regional Gault&Millau, j’ai explore cuisines de terroir et tables etoilees. Mon travail m’a menee des bistrots parisiens aux auberges familiales italiennes, avec une attention particuliere pour le lien entre gastronomie, voyage et art de recevoir a la maison. Je partage ici mes experiences concretes, mes methodes d’organisation et mes adresses preferees pour aider chacun a cuisiner mieux et accueillir avec confiance.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

वीडियो

हमारा नेटवर्क