स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हरविन्द कौर बनीं आत्मनिर्भर, कैंटीन से कमा रहीं 10 हजार रुपये मासिक

– गृहणी के रूप में घर संभालने के साथ-साथ हरविन्द कौर कैंटीन का संचालन कर बनीं दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा
सिरसा, 19 सितंबर।
डबवाली गांव की रहने वाली हरविन्द कौर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने लिए रोजगार का साधन तैयार किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मिसाल कायम की है। कभी गृहणी के रूप में घर संभालने वाली हरविन्द कौर आज कैंटीन का संचालन कर प्रतिमाह करीब 10 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

हरविन्द कौर गुरु नानक महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुडऩे से पहले वह गृहणी थीं। स्वयं सहायता समूह से जुडऩे के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए रोजगार शुरू करने की योजना बनाई। समूह से उन्हें योजना बनाने और आगे बढऩे के लिए प्रेरणा मिली।

हरविन्द कौर ने बताया कि उन्होंने 14 मार्च 2024 से हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से डबवाली गांव में कैंटीन का काम शुरू किया। इससे पहले उन्होंने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वयं का रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। आज कैंटीन के माध्यम से उन्हें नियमित आमदनी हो रही है।

उन्होंने बताया कि कैंटीन शुरू करने से पहले उनकी मासिक आय लगभग 2 हजार रुपये थी, जबकि अब कैंटीन के काम से उनकी मासिक आमदनी करीब 10 हजार रुपये हो गई है। हरविन्द कौर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुडऩे के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने के लिए खुद का रोजगार शुरू किया। अब वह अपने अनुभव के आधार पर गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुडक़र आत्मनिर्भर बनने तथा अपने रोजगार की शुरुआत करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अपना योगदान देना है, ताकि महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकें। हरविन्द कौर की यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें अपनी क्षमता को पहचानने, रोजगार शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।

Pauline Roussel

Je suis Pauline Roussel, journaliste culinaire et consultante en arts de la table depuis plus de quinze ans. Diplomee en management de l’hotellerie-restauration a l’Institut Paul Bocuse et ancienne critique gastronomique pour un guide regional Gault&Millau, j’ai explore cuisines de terroir et tables etoilees. Mon travail m’a menee des bistrots parisiens aux auberges familiales italiennes, avec une attention particuliere pour le lien entre gastronomie, voyage et art de recevoir a la maison. Je partage ici mes experiences concretes, mes methodes d’organisation et mes adresses preferees pour aider chacun a cuisiner mieux et accueillir avec confiance.

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