सिरसा में परंपरागत खेती छोड़ी तो बदली किस्मत, किसान मुकेश ने किन्नू के साथ शुरू की गेंदा व सब्जियों की खेती


– जयपुर में पसंद आई हाइब्रिड गेंदा की वैरायटी, सिरसा के किसान ने किया प्रयोग
– तीन से चार एकड़ में गेंदा की खेती, हिसार से लुधियाना तक हो रही फूलों की सप्लाई
– वैज्ञानिक खेती को बनाया सफलता का आधार, गेंदा, किन्नू और सब्जियों से बढ़ाई आमदनी
– परंपरागत खेती छोड़
किसान ने अपनाई फूलों और सब्जियों की खेती, जयपुर से मिली प्रेरणा
सिरसा, 18 सितंबर।

खंड बड़ागुढ़ा के गांव छतरियां निवासी 40 वर्षीय किसान मुकेश कुमार ने परंपरागत खेती से हटकर वैज्ञानिक एवं विविधतापूर्ण खेती को अपनाकर नई मिसाल पेश की है। बीए और बीएड तक शिक्षा प्राप्त करने वाले मुकेश कुमार ने पहले करीब 10 एकड़ भूमि में किन्नू का बाग लगाया। इसके बाद पुष्कर और जयपुर गए, जहां जयपुर में उन्होंने हाइब्रिड गेंदा की एक वैरायटी देखी। गेंदा की इस किस्म ने उन्हें प्रभावित किया और उन्होंने बागवानी विभाग की योजनाओं का लाभ लेते हुए इसकी खेती शुरू करने का निर्णय लिया।

मुकेश कुमार ने शुरुआत में एक एकड़ भूमि में हाइब्रिड गेंदा की खेती शुरू की। प्रयोग सफल रहा तो उन्होंने धीरे-धीरे इसका रकबा बढ़ा दिया। वर्तमान में किसान तीन से चार एकड़ भूमि में गेंदा की खेती कर रहे हैं। उनके खेत में तैयार होने वाला गेंदा स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि हिसार, बठिंडा, संगरूर और लुधियाना तक इसकी सप्लाई की जा रही है। किसान के अनुसार एक एकड़ में करीब 70 से 90 क्विंटल तक गेंदा की पैदावार प्राप्त हो जाती है।

गेंदा के बाद बेल वाली सब्जियों की खेती
किसान मुकेश कुमार ने खेती में विविधता का भी विशेष ध्यान रखा है। गेंदा की फसल लेने के बाद उसी भूमि का उपयोग बेल वाली सब्जियों की खेती के लिए किया जाता है। इसमें घीया, तोरी और परमल जैसी सब्जियां शामिल हैं। इस प्रकार एक ही खेत से अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों का उत्पादन लेकर भूमि का बेहतर उपयोग किया जा रहा है।

ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत, खेत में नहीं होता जलभराव
मुकेश कुमार ने अपने पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाया हुआ है। चाहे किन्नू का बाग हो या सब्जियों और फूलों की खेती, सभी फसलों में ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सिंचाई की जा रही है। किसान ने बताया कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए उन्होंने सरकारी सहायता का भी लाभ लिया है। इसके साथ ही खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होने के कारण तेज बरसात के दौरान भी खेत में जलभराव की समस्या नहीं होती।

अपनी जमीन के साथ ठेके पर भी ले रहे जमीन
खेती में लगातार बेहतर परिणाम मिलने के बाद मुकेश कुमार अब अपनी जमीन के साथ-साथ अतिरिक्त जमीन ठेके पर लेकर भी खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसान यदि परंपरागत खेती तक सीमित रहने के बजाय बाजार की मांग, नई तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाए तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

किसान मुकेश कुमार का कहना है कि कृषि में नए प्रयोग करने से किसान अपनी आमदनी के साधनों को बढ़ा सकता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, फूलों और सब्जियों की खेती को भी अपनाएं तथा ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें। इससे पानी की बचत के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार किया जा सकता है।

Pauline Roussel

Je suis Pauline Roussel, journaliste culinaire et consultante en arts de la table depuis plus de quinze ans. Diplomee en management de l’hotellerie-restauration a l’Institut Paul Bocuse et ancienne critique gastronomique pour un guide regional Gault&Millau, j’ai explore cuisines de terroir et tables etoilees. Mon travail m’a menee des bistrots parisiens aux auberges familiales italiennes, avec une attention particuliere pour le lien entre gastronomie, voyage et art de recevoir a la maison. Je partage ici mes experiences concretes, mes methodes d’organisation et mes adresses preferees pour aider chacun a cuisiner mieux et accueillir avec confiance.

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